बिहार राज्य में स्थित मोतिहारी शहर एक पॉपुलर ट्रेवल डेस्टिनेशन है। बिहार राज्य में घूमने के लिए आने वाले सैलानी मोतिहारी अवश्य आते हैं। यह राज्य की राजधानी पटना से 156 किमी की दूरी पर स्थित है और अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए बेहद ही प्रसिद्ध है। इसके अलावा, आध्यात्मिक दृष्टिकोण के लिए भी यह बेहद महत्वपूर्ण है।
बता दें कि इसी शहर से महात्मा गांधी ने पहली बार ब्रिटिश शासन के खिलाफ अपना पौराणिक सत्याग्रह शुरू किया था। ऐसा माना जाता है कि महान लेखक जॉर्ज ऑरवेल का जन्म यहीं हुआ था। यही कारण है कि यहां पर ऐसे कई स्थान व स्तंभ आदि मौजूद है, जो लोगों को बेहद ही आकर्षित करते हैं और इस स्थान के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको मोतिहारी में स्थित कुछ बेहतरीन स्थानों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें आपको भी अवश्य देखना चाहिए-
केसरिया बौद्ध स्तूप
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मोतिहारी में हैं तो इन जगहों पर अवश्य घूमें
अगर आप बिहार के मोतिहारी में हैं तो आप इन जगहों को एक्सप्लोर कर सकती हैं।
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MITALI JAIN
Editorial
Published -15 Oct 2022, 14:00 IST
Updated -14 Oct 2022, 18:42 IST
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बिहार राज्य में स्थित मोतिहारी शहर एक पॉपुलर ट्रेवल डेस्टिनेशन है। बिहार राज्य में घूमने के लिए आने वाले सैलानी मोतिहारी अवश्य आते हैं। यह राज्य की राजधानी पटना से 156 किमी की दूरी पर स्थित है और अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए बेहद ही प्रसिद्ध है। इसके अलावा, आध्यात्मिक दृष्टिकोण के लिए भी यह बेहद महत्वपूर्ण है।
बता दें कि इसी शहर से महात्मा गांधी ने पहली बार ब्रिटिश शासन के खिलाफ अपना पौराणिक सत्याग्रह शुरू किया था। ऐसा माना जाता है कि महान लेखक जॉर्ज ऑरवेल का जन्म यहीं हुआ था। यही कारण है कि यहां पर ऐसे कई स्थान व स्तंभ आदि मौजूद है, जो लोगों को बेहद ही आकर्षित करते हैं और इस स्थान के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको मोतिहारी में स्थित कुछ बेहतरीन स्थानों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें आपको भी अवश्य देखना चाहिए-
केसरिया बौद्ध स्तूप
visit to Kesariya Buddha Stupa
मोतिहारी के नजदीक केसरिया दुनिया के सबसे बड़े बौद्ध स्तूपों में से एक है और यही कारण है कि दुनियाभर से बौद्ध धर्म के अनुयायी यहां पर आना और इस स्तूप के दर्शन करने के लिए आते हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने साल 1998 में इसकी खुदाई की गई थी। यह स्तूप लगभग 104 फीट ऊंचा है। बता दें कि इसे राजा बेन का देवड़ा भी कहा जाता है। इस स्तूप को लेकर मान्यता है कि भगवान बुद्ध के निर्वाण प्राप्त करने से पहले वैशाली में लिच्छिवियों द्वारा इसका निर्माण किया गया था।
गांधी मेमोरियल
मोतिहारी में गांधी मेमोरियल की नींव वर्ष 1972 में तत्कालीन राज्यपाल श्री डी.के.बरूच ने रखी थी। यह स्मारक दमनकारी ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत की याद के रूप में बनाया गया है। मोतिहारी में ही महात्मा गांधी ने सबसे पहले गरीब किसानों के खिलाफ किए जाने वाले अंग्रेजों के अत्याचारों के खिलाफ सत्याग्रह किया था। गांधी मेमोरियल में एक लाइब्रेरी के अलावा म्यूजियम स्थित है, जिसमें चंपारण सत्याग्रह से जुड़ी कुछ तस्वीरें रखी गई हैं।
जॉर्ज ऑरवेल स्मारक
मोतिहारी का संबंध सिर्फ आजादी पाने के लिए किए गए प्रयासों से ही नहीं है, बल्कि यह शहर अंग्रेजी साहित्य से भी गहरा नाता रखने के लिए जाना जाता है। आपको शायद पता ना हो लेकिन अंग्रेजी साहित्य के महान लेखक जॉर्ज ऑरवेल का जन्म स्थान भी यही है। इसलिए, इस महान लेखक की याद मे यहां पर जॉर्ज ऑरवेल स्मारक बनाया गया है।
मोतीझील
यह एक बेहद ही खूबसूरत नहर है, जो शहर के मध्य में स्थित है। यहां पर आने वाला हर सैलानी एक बार मोती झील के मनोरम दृश्यों को देखने का आनंद अवश्य उठाते हैं। अगर आप यहां पर हैं तो आपको सूर्यास्त का नजारा अवश्य देखना चाहिए। इससे व्यक्ति को बेहत ही सुकून होता है और आप प्रकृति की खूबसूरती को बेहद ही करीब से देख पाते हैं। आप यहां पर प्रकृति की खूबसूरती को निहारने के अलावा बोटिंग का आनंद भी ले सकते हैं।
गायत्री मंदिर
यह मंदिर स्वयं में बेहद ही अनूठा है और इस मंदिर को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि कोई गायत्री देवी की पूजा करता है, तो उसे उच्च स्तर का ज्ञान प्राप्त होता है। यही कारण है कि लोग सद्बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति के लिए इस मंदिर में दर्शन के लिए अवश्य आते हैं।